नालंदा डीएम का बड़ा फैसला, चिरकुट और दफ्तर के चक्कर खत्म! अब केवल भू-अभिलेख पोर्टल से ही मिलेगी सत्यापित प्रति
बिहार शरीफ, नालंदा। जिला पदाधिकारी, नालंदा कुंदन कुमार के निर्देशानुसार दिनांक 01 जनवरी 2026 से राजस्व अभिलेखों की सत्यापित (नकल) प्रति निर्गत करने की पूर्व से प्रचलित भौतिक प्रणाली को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है। अब सभी प्रकार के राजस्व अभिलेखों की डिजिटल हस्ताक्षरित प्रतियां केवल भू-अभिलेख पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन ही उपलब्ध कराई जाएंगी, जो विधिक रूप से सत्यापित प्रतिलिपि के रूप में मान्य होंगी।
अब तक राजस्व अभिलेखों अथवा दस्तावेजों की सत्यापित प्रति प्राप्त करने के लिए आवेदकों को संबंधित अभिलेखागार या कार्यालय में बिहार अभिलेख हस्तक, 1960 के अंतर्गत निर्धारित प्रपत्र (जिसे सामान्यतः चिरकुट कहा जाता है) में आवेदन करना पड़ता था। इस प्रक्रिया में आवेदक को अपना नाम, पता, वांछित दस्तावेज, संबंधित कार्यालय का विवरण, निर्धारित समय-सीमा सहित अन्य जानकारियां भरनी होती थीं। इसके साथ ही स्टाम्प शुल्क एवं प्रति पृष्ठ निर्धारित शुल्क का भुगतान कर आवेदन जमा किया जाता था।
आवेदन प्राप्त होने के बाद कार्यालय में उसका पंजीकरण किया जाता था तथा प्रभारी लिपिक द्वारा पदाधिकारी के आदेश के उपरांत मूल अभिलेख की छायाप्रति को सत्यापित कर आवेदक को प्रदान किया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में आवेदक को कई बार कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता था और सामान्यतः सत्यापित प्रति प्राप्त करने में 7 से 14 दिनों का समय लग जाता था। यह व्यवस्था आम नागरिकों के लिए श्रमसाध्य, खर्चीली तथा विशेष रूप से दूर-दराज क्षेत्रों के लोगों के लिए कठिनाईपूर्ण थी।
वर्तमान में भू-अभिलेख पोर्टल के माध्यम से राजस्व अभिलेखों की स्कैन की गई प्रतियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस पोर्टल के जरिए आवेदक आवश्यक शुल्क का ऑनलाइन भुगतान कर डिजिटल हस्ताक्षरित प्रतियां प्राप्त कर सकते हैं, जिसका लाभ बड़ी संख्या में नागरिक उठा रहे हैं।
इस संबंध में राजस्व पर्षद, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या 831 दिनांक 26 जून 2024 के माध्यम से बिहार अभिलेखागार हस्तक, 1960 के अध्याय-8 के अंतर्गत नियम-297 (क) अंतःस्थापित किया गया है, जिसके अनुसार ऑनलाइन विधि से निर्गत और सक्षम पदाधिकारी द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित अभिलेखों की प्रतियां प्रमाणित प्रतिलिपि मानी जाएंगी।
इसके अतिरिक्त भू-अभिलेख पोर्टल पर यह सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है कि यदि कोई वांछित राजस्व अभिलेख ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है, तो आवेदक उसकी मांग ऑनलाइन ही दर्ज कर सकते हैं। अभिलेख उपलब्ध होने पर उसकी डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति पोर्टल के माध्यम से आवेदक को उपलब्ध करा दी जाएगी।
इन सभी व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि राजस्व अभिलेखों की भौतिक सत्यापित प्रति (नकल) निर्गत करने की पूर्व प्रचलित प्रणाली को जारी रखने की अब कोई आवश्यकता नहीं है।
अतः 01 जनवरी 2026 से सभी प्रकार के राजस्व अभिलेखों की केवल डिजिटल हस्ताक्षरित प्रतियां ही भू-अभिलेख पोर्टल के माध्यम से निर्गत की जाएंगी, जो विधिसम्मत एवं सत्यापित प्रतिलिपि के रूप में मान्य होंगी।
