जेठियन–राजगीर धम्म यात्रा में उमड़ा अंतरराष्ट्रीय बौद्ध समुदाय, मानवता और शांति का दिया गया संदेश
नालंदा। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी नव नालन्दा महाविहार (सम विश्वविद्यालय), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जेठियन – राजगीर अंतरराष्ट्रीय धम्म यात्रा का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश–विदेश से आए बौद्ध श्रद्धालुओं, भिक्षु–भिक्षुणियों एवं विद्यार्थियों की व्यापक सहभागिता देखने को मिली।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नालंदा के जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने कहा कि बुद्धचर्या पथ पर आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय धम्म यात्रा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि मानवता, शांति और करुणा का सशक्त संदेश है। उन्होंने इस पावन अवसर को ‘बुद्धचारिका दिवस’ के रूप में मनाए जाने का आह्वान किया। जिलाधिकारी ने गया एवं नालंदा जिला प्रशासन तथा वन विभाग के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासनिक सहयोग के बिना इतने व्यापक और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न करना संभव नहीं होता। यह धम्म यात्रा बिहार की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक है और आज के वैश्विक संकटों के दौर में शांति की दिशा में एक प्रेरणादायक संदेश प्रस्तुत करती है।

इस धम्म यात्रा में नव नालन्दा महाविहार के शिक्षक, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं, अध्ययनरत भिक्षु–भिक्षुणियों के साथ-साथ श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, वियतनाम, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, अमेरिका, जापान, चीन, लाओस सहित कई देशों से आए बौद्ध श्रद्धालुओं एवं भिक्षुओं ने भाग लिया।
उल्लेखनीय है कि नव नालन्दा महाविहार वर्ष 2014 से इस धम्म यात्रा का निरंतर आयोजन कर रहा है। इस वर्ष 12वीं जेठियन–राजगीर धम्म यात्रा का आयोजन लाइट ऑफ बुद्धा धम्म फाउंडेशन इंटरनेशनल, बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति, इंटरनेशनल बौद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (नई दिल्ली), पर्यटन विभाग बिहार सरकार तथा जेठियन ग्रामवासियों के सहयोग से किया गया।
नव नालन्दा महाविहार के माननीय कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह के नेतृत्व में यह यात्रा गया जिले के जेठियन ग्राम (प्राचीन नाम यष्ठिवन) से प्रारंभ होकर प्राचीन बुद्धचारिका पथ से होते हुए लगभग 15 किलोमीटर की दूरी तय कर वेणुवन, राजगीर (नालंदा) में संपन्न हुई। इस वर्ष लगभग 1500 धम्म यात्रियों एवं श्रद्धालुओं ने इसमें भाग लेकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
यह वही पावन मार्ग है, जिससे भगवान बुद्ध ने सम्यक संबोधि प्राप्ति के बाद सारनाथ में धम्मचक्र प्रवर्तन के उपरांत मगधराज बिम्बिसार से मिलने राजगृह की यात्रा की थी। मगधराज बिम्बिसार ने यष्ठिवन में तथागत का स्वागत कर उन्हें वेणुवन में ठहराया था, जिसे बाद में उन्होंने भिक्षुसंघ को दान स्वरूप अर्पित कर दिया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने अपने विस्तृत उद्बोधन में कहा कि यह मार्ग केवल ऐतिहासिक पथ नहीं, बल्कि बुद्धत्व की ओर अग्रसर मानवता के कदमों की जीवंत गूंज है। भगवान बुद्ध ने अनेक बार इसी मार्ग से चारिका की और अनगिनत उपदेश दिए। यह पथ फ़ाह्यान और ह्वेनसांग जैसे महान बौद्ध यात्रियों की आध्यात्मिक यात्राओं का भी साक्षी रहा है। यह धम्म यात्रा शांति, करुणा और सह-अस्तित्व की उस अमर परंपरा का पुनर्जीवन है, जिसे बुद्ध ने संसार को दिया। अतः इस दिवस को ‘बुद्धचारिका दिवस’ के रूप में घोषित किया जाना पूर्णतः न्यायसंगत है।
कार्यक्रम में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के उप सचिव नदीम अहमद, वागमों डिक्सी, रिचर्ड डिक्सी, नव नालन्दा महाविहार की कुलसचिव प्रो. रूबी कुमारी, विभिन्न बौद्ध मठों के प्रमुख भिक्षु, बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति के प्रतिनिधि सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। संपूर्ण यात्रा कार्यक्रम का सुसंचालन एवं समन्वयन नव नालन्दा महाविहार के बौद्ध अध्ययन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार द्वारा किया गया।
जेठियन–राजगीर धम्म यात्रा में उमड़ा अंतरराष्ट्रीय बौद्ध समुदाय, मानवता और शांति का दिया गया संदेश
शंकर कुमार सिन्हा, जिला ब्यूरो चीफ, दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार, नालंदा बिहार।
13 दिसंबर 2025
नालंदा। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी नव नालन्दा महाविहार (सम विश्वविद्यालय), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जेठियन – राजगीर अंतरराष्ट्रीय धम्म यात्रा का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश–विदेश से आए बौद्ध श्रद्धालुओं, भिक्षु–भिक्षुणियों एवं विद्यार्थियों की व्यापक सहभागिता देखने को मिली।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नालंदा के जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने कहा कि बुद्धचर्या पथ पर आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय धम्म यात्रा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि मानवता, शांति और करुणा का सशक्त संदेश है। उन्होंने इस पावन अवसर को ‘बुद्धचारिका दिवस’ के रूप में मनाए जाने का आह्वान किया। जिलाधिकारी ने गया एवं नालंदा जिला प्रशासन तथा वन विभाग के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासनिक सहयोग के बिना इतने व्यापक और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न करना संभव नहीं होता। यह धम्म यात्रा बिहार की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक है और आज के वैश्विक संकटों के दौर में शांति की दिशा में एक प्रेरणादायक संदेश प्रस्तुत करती है।
इस धम्म यात्रा में नव नालन्दा महाविहार के शिक्षक, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं, अध्ययनरत भिक्षु–भिक्षुणियों के साथ-साथ श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, वियतनाम, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, अमेरिका, जापान, चीन, लाओस सहित कई देशों से आए बौद्ध श्रद्धालुओं एवं भिक्षुओं ने भाग लिया।
उल्लेखनीय है कि नव नालन्दा महाविहार वर्ष 2014 से इस धम्म यात्रा का निरंतर आयोजन कर रहा है। इस वर्ष 12वीं जेठियन–राजगीर धम्म यात्रा का आयोजन लाइट ऑफ बुद्धा धम्म फाउंडेशन इंटरनेशनल, बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति, इंटरनेशनल बौद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (नई दिल्ली), पर्यटन विभाग बिहार सरकार तथा जेठियन ग्रामवासियों के सहयोग से किया गया।
नव नालन्दा महाविहार के माननीय कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह के नेतृत्व में यह यात्रा गया जिले के जेठियन ग्राम (प्राचीन नाम यष्ठिवन) से प्रारंभ होकर प्राचीन बुद्धचारिका पथ से होते हुए लगभग 15 किलोमीटर की दूरी तय कर वेणुवन, राजगीर (नालंदा) में संपन्न हुई। इस वर्ष लगभग 1500 धम्म यात्रियों एवं श्रद्धालुओं ने इसमें भाग लेकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
यह वही पावन मार्ग है, जिससे भगवान बुद्ध ने सम्यक संबोधि प्राप्ति के बाद सारनाथ में धम्मचक्र प्रवर्तन के उपरांत मगधराज बिम्बिसार से मिलने राजगृह की यात्रा की थी। मगधराज बिम्बिसार ने यष्ठिवन में तथागत का स्वागत कर उन्हें वेणुवन में ठहराया था, जिसे बाद में उन्होंने भिक्षुसंघ को दान स्वरूप अर्पित कर दिया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने अपने विस्तृत उद्बोधन में कहा कि यह मार्ग केवल ऐतिहासिक पथ नहीं, बल्कि बुद्धत्व की ओर अग्रसर मानवता के कदमों की जीवंत गूंज है। भगवान बुद्ध ने अनेक बार इसी मार्ग से चारिका की और अनगिनत उपदेश दिए। यह पथ फ़ाह्यान और ह्वेनसांग जैसे महान बौद्ध यात्रियों की आध्यात्मिक यात्राओं का भी साक्षी रहा है। यह धम्म यात्रा शांति, करुणा और सह-अस्तित्व की उस अमर परंपरा का पुनर्जीवन है, जिसे बुद्ध ने संसार को दिया। अतः इस दिवस को ‘बुद्धचारिका दिवस’ के रूप में घोषित किया जाना पूर्णतः न्यायसंगत है।
कार्यक्रम में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के उप सचिव नदीम अहमद, वागमों डिक्सी, रिचर्ड डिक्सी, नव नालन्दा महाविहार की कुलसचिव प्रो. रूबी कुमारी, विभिन्न बौद्ध मठों के प्रमुख भिक्षु, बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति के प्रतिनिधि सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। संपूर्ण यात्रा कार्यक्रम का सुसंचालन एवं समन्वयन नव नालन्दा महाविहार के बौद्ध अध्ययन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार द्वारा किया गया।
