नालंदा मतगणना में निष्पक्षता पर इंडिया महागठबंधन ने उठाए सवाल, निर्वाचन आयोग और डीएम से मांगा जवाब

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नालंदा(बिहार) : इंडिया महागठबंधन ने नालंदा जिले में मतगणना की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गठबंधन ने निर्वाचन आयोग एवं जिलाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी, नालंदा से सात बिंदुओं पर स्पष्टीकरण की मांग की है। गठबंधन ने कहा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 64 के अनुसार प्रत्येक प्रत्याशी, उनके निर्वाचन एजेंट और मतगणना एजेंटों को मतगणना के दौरान उपस्थित रहने का अधिकार है। गठबंधन का कहना है कि नालंदा कॉलेज, बिहार शरीफ में बनाए गए मतगणना केंद्र में सभी उम्मीदवारों और उनके एजेंटों की उपस्थिति संभव नहीं है। ऐसे में निर्वाचन नियम 1961 के नियम 65 के तहत एक निर्वाचन क्षेत्र में दो या अधिक मतगणना केंद्र बनाए जा सकते हैं, किंतु जिलाधिकारी की ओर से इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे निष्पक्ष मतगणना पर संदेह उत्पन्न हो रहा है।

महागठबंधन ने बताया कि मतगणना के दौरान कंट्रोल यूनिट (CU) की विशिष्ट आईडी, पिंक पेपर सील और ग्रीन पेपर सील को मतगणना शुरू करने से पूर्व एजेंटों को दिखाना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त मतदान की शुरुआत और समाप्ति की तिथि व समय को भी CU पर प्रदर्शित कर एजेंटों को दिखाना जरूरी है। यह प्रक्रिया निर्वाचन नियम 55(ग) और 56(ग) में स्पष्ट रूप से उल्लिखित है। गठबंधन ने यह भी कहा कि फॉर्म 17(ग) के भाग-2 में हस्ताक्षर लेने से पहले मतगणना प्रेक्षक और उम्मीदवारों/एजेंटों के हस्ताक्षर के बीच प्रमाणिक टिप्पणी लिखना और रिटर्निंग ऑफिसर को प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है, जैसा कि हैंडबुक 2023 में वर्णित है।

गठबंधन के अनुसार, मतगणना एजेंटों की बैठने की व्यवस्था निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित क्रम में होनी चाहिए जिसमें पहले मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दलों के उम्मीदवारों के एजेंट, उसके बाद राज्य दलों के उम्मीदवारों के एजेंट, फिर अन्य राज्यों के मान्यता प्राप्त दलों के एजेंट, पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दलों के एजेंट और अंत में स्वतंत्र उम्मीदवारों के एजेंट शामिल हों। गठबंधन ने कहा कि सीलों की जांच के बाद राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में स्ट्रॉन्ग रूम खोला जाना चाहिए, मतगणना की शुरुआत डाक मतपत्रों और ईटीबीएस की गिनती से होनी चाहिए तथा आधे घंटे बाद कंट्रोल यूनिट को मतगणना हॉल में लाया जाना चाहिए।

रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा प्रत्येक राउंड का परिणाम प्रेक्षक के हस्ताक्षर के साथ घोषित किया जाना चाहिए और उसकी प्रति सभी प्रत्याशियों को दी जानी चाहिए। नियम 54(ए) के अनुसार पोस्टल बैलेट पेपर को पहले गिना जाना चाहिए। निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश (17 सितंबर 2020) के मुताबिक 85 वर्ष से ऊपर, दिव्यांग, कोविड पॉजिटिव या संदिग्ध मतदाताओं के पोस्टल बैलेट को भी गिनती में शामिल किया जाना आवश्यक है।

महागठबंधन ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में नालंदा कॉलेज स्थित स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी के लिए लगाए गए टीवी स्क्रीन को 28 मिनट तक बंद रखा गया था, जिसका वीडियो साक्ष्य सोशल मीडिया पर साझा किया गया है। इसके बावजूद निर्वाचन आयोग या उनके प्रतिनिधियों ने कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण नहीं दिया। गठबंधन ने कहा कि इससे मतगणना प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका और बढ़ जाती है।

महागठबंधन ने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि मीडिया लोकतंत्र का प्रहरी है और निष्पक्ष व पारदर्शी मतगणना सुनिश्चित करने में उसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। गठबंधन ने कहा कि वे अपनी आशंकाओं और अनुभवों को मीडिया के माध्यम से प्रशासन तक पहुंचाना चाहते हैं ताकि निष्पक्षता बनी रहे। उन्होंने सरकारी पदाधिकारियों से आग्रह किया कि वे संविधान की शपथ के अनुरूप अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें और निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन ईमानदारी से करें।

महागठबंधन ने यह भी कहा कि यदि कोई अधिकारी अपने संवैधानिक अधिकार से हटकर कार्य करेगा, तो वे जनता के सहयोग से उसके खिलाफ सड़क से लेकर न्यायालय तक कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि यह मांग किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता को बनाए रखने के लिए है ताकि जनता के मतों का सही सम्मान हो और परिणामों की पारदर्शिता पर कोई प्रश्नचिह्न न लगे।

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