राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में ‘नालंदा डेवलपमेंट डायलॉग 2026’ का भव्य शुभारंभ

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रानी सिन्हा की रिपोर्ट,

राजगीर (नालंदा)। ऐतिहासिक नगरी राजगीर में स्थित Nalanda University के परिसर में रविवार को Nalanda Development Dialogue 2026 के प्रथम संस्करण का भव्य शुभारंभ हुआ। अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस सेमिनार में भारत सहित विभिन्न देशों के ख्यातिप्राप्त नीति-निर्माता, अर्थशास्त्री और विकास विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2030 के बाद की वैश्विक विकास रूपरेखा और वर्तमान चुनौतियों पर एक ठोस वैचारिक मंच तैयार करना है।

कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति Sachin Chaturvedi ने स्वागत भाषण देते हुए समानता और सततता के सिद्धांतों पर आधारित विकास संवाद को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बढ़ती असमानता और बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच अकादमिक जगत और नीति-निर्माताओं के बीच मजबूत सेतु बनाना आवश्यक है, ताकि ‘ग्लोबल साउथ’ के दृष्टिकोण से न्यायसंगत और समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त किया जा सके।

इस अवसर पर Economic Advisory Council to the Prime Minister की सदस्य Shamika Ravi ने भारत की विकास यात्रा का विश्लेषण करते हुए आर्थिक परिवर्तन और गरीबी उन्मूलन की उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने विशेष रूप से श्रम बाजार में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को देश की प्रगति का एक प्रेरणादायक पहलू बताया।

वहीं Yale University के प्रोफेसर Thomas Pogge ने विकास के पारंपरिक मापदंडों की आलोचना करते हुए कहा कि केवल जीडीपी के आधार पर मानव कल्याण और पर्यावरणीय प्रभावों का सही आकलन संभव नहीं है। उन्होंने विकास को व्यक्ति-केंद्रित और नैतिक दृष्टिकोण पर आधारित बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

इसके अलावा Jawaharlal Nehru University के एमेरिटस प्रोफेसर Deepak Nayyar ने वैश्विक व्यवस्था के बदलते स्वरूप पर चर्चा करते हुए कहा कि विकासशील देशों का बढ़ता आर्थिक प्रभाव एक संतुलित और बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन जैसी साझा चुनौतियों के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को अनिवार्य बताया।

यह दो दिवसीय संवाद Centre for Studies in Development and Sustainability द्वारा आयोजित किया गया है। पहले दिन सतत विकास और वैश्विक आर्थिक रणनीतियों पर कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए। इस संवाद का दूसरा और समापन सत्र सोमवार, 9 मार्च को आयोजित होगा, जिसमें विशेषज्ञ विभिन्न विषयगत सत्रों के माध्यम से भविष्य की विकास दिशा पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।

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