नालंदा में CBRN आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल: एनडीआरएफ ने चार चरणों में दिखाया प्रभावी बचाव संचालन

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बिहारशरीफ (नालंदा) : जिला अग्निशमन कार्यालय कैंपस में बुधबार को CBRN (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर) आपदा प्रबंधन को लेकर व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित किया गया। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की देखरेख में हुए इस अभ्यास का उद्देश्य रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु आपदा की संभावित स्थिति में विभागीय तैयारियों और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली का आकलन करना था।

इस ड्रिल में एनडीआरएफ की 9वीं बटालियन, बिहटा पटना की टीम ने एक काल्पनिक CBRN आपदा परिदृश्य तैयार कर बचाव कार्यों का प्रदर्शन किया। एक्सरसाइज की शुरुआत इमरजेंसी इन्फॉर्मेशन पैनल की स्थापना के साथ हुई, जिसके बाद रिस्पॉन्स टीम की तैनाती और स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) आधारित कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम को सक्रिय किया गया।

ड्रिल के दौरान सबसे पहले खतरनाक रासायनिक, जैविक या रेडियोलॉजिकल पदार्थों की पहचान करने की प्रक्रिया दिखाई गई। विशेष उपकरणों और तकनीकों की मदद से यह बताया गया कि खतरे की प्रकृति और स्तर का निर्धारण कैसे किया जाता है। इसके बाद डी-कंटैमिनेशन प्रक्रिया का प्रदर्शन करते हुए प्रभावित क्षेत्र एवं लोगों को दूषण से मुक्त करने के तरीके समझाए गए।

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कार्यक्रम के तीसरे चरण में पीड़ितों के प्राथमिकता आधारित बचाव कार्य का प्रदर्शन किया गया। गंभीर रूप से प्रभावित और कम प्रभावित लोगों के वर्गीकरण की पद्धति और उनके सुरक्षित निकासी की तकनीक बताई गई। अंतिम चरण में राहतकर्मियों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनाए जाने वाले प्रोटोकॉल, सुरक्षा उपकरणों और सतर्कता उपायों का प्रदर्शन किया गया।

मॉक ड्रिल की खास बात विभिन्न विभागों के बीच उत्कृष्ट समन्वय रहा। आयुध निर्माण विभाग, यातायात पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन सेवा, जिला समाहरणालय तथा आपदा प्रबंधन विभाग के कर्मियों ने संयुक्त रूप से भाग लिया और अपनी तैयारी प्रदर्शित की।

अभ्यास के बाद आयोजित समीक्षा बैठक में विभागीय प्रतिक्रिया, एजेंसियों के बीच समन्वय, संसाधनों में मौजूद अंतर (Gap Analysis) और सुधार के उपायों पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम में एनडीआरएफ की 9वीं बटालियन के उप-कमांडेंट और जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने इस अभ्यास को अत्यंत सफल बताते हुए कहा कि ऐसे मॉक ड्रिल से न केवल विभागों की तैयारी का परीक्षण होता है, बल्कि CBRN जैसी जटिल आपदाओं से निपटने की क्षमता भी मजबूत होती है।

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