पति और बेटे को खोने के बाद महिला ने दिखाई अनोखी आस्था, 13 बीघा जमीन बेचकर बना रहीं भव्य मंदिर, नालंदा के बराह गांव की चंद्रकांता प्रियदर्शी बनीं मिसाल

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नालंदा। जिले स्थित बराह गांव की एक महिला आज न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गई हैं। चंद्रकांता प्रियदर्शी ने पति और बेटे की मृत्यु के बाद अपने जीवन की पूरी जमा-पूंजी और संपत्ति मंदिर निर्माण में लगा दी है। अपने दुःख को शक्ति में बदलते हुए उन्होंने लगभग दो करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंदिर निर्माण में समर्पित कर दी है।

चंद्रकांता प्रियदर्शी के पति अरुण कुमार का निधन वर्ष 2014 में ब्रेन हेमरेज से हो गया था। इसके बाद 2023 में उनका बेटा सूर्य प्रियदर्शी, जो बाबा रामदेव के आचार्य कुलम में पढ़ता था और छुट्टी पर घर आया हुआ था, पटना में बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। पति और बेटे के गुजर जाने के बाद चंद्रकांता पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन उन्होंने इस दर्द को समाज सेवा और धर्म निर्माण के रूप में बदलने का निर्णय लिया।

चंद्रकांता बताती हैं कि उनके पति खेती करते थे और उन्हें करीब 20 बीघा जमीन विरासत में मिली थी। इनमें से लगभग 13 बीघा जमीन उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए बेच दी। जबकि पांच बीघा जमीन वे पति और बेटे के इलाज में खर्च कर चुकी थीं। फिलहाल उनके पास केवल दो बीघा जमीन बची है, जिसे भी वे मंदिर निर्माण में लगाने की इच्छा रखती हैं।

बराह गांव में बन रहा यह भव्य मंदिर अब निर्माण के अंतिम चरण में है। मंदिर परिसर में राधा-कृष्ण, सूर्य नारायण भगवान, दुर्गा जी के नौ रूप, पंचमुखी हनुमान, अर्धनारीश्वर शिवलिंग, शनिदेव समेत कई दिव्य प्रतिमाओं की स्थापना की जा रही है। इतना ही नहीं, अपने दिवंगत पति और बेटे की जीवन-आकार (आदमकद) प्रतिमाएँ स्थापित करने की भी उन्होंने तैयारी कर ली है।

चंद्रकांता प्रियदर्शी का यह अद्भुत समर्पण और आस्था पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गया है। दुःखों से टूटने के बजाय उन्होंने उसे मानवता और धर्म के प्रति सेवा में बदल दिया, जिससे वे आज बराह गांव ही नहीं, पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

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