महाभारतकालीन कुएं के जीर्णोद्धार की दरकार, जीर्णोद्धार नहीं हुआ तो मिट जाएगी ऐतिहासिक पहचान
अनुमंडल संवाददाता, राजगीर, राजीव लोचन की रिपोर्ट, राजगीर (नालंदा)। ऐतिहासिक एवं पर्यटन नगरी राजगीर के मनियार मठ के समीप स्थित एक प्राचीन महाभारतकालीन कुआं आज उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। उचित रख-रखाव और संरक्षण के अभाव में यह ऐतिहासिक धरोहर अपनी पहचान खोती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इसका जीर्णोद्धार नहीं कराया गया, तो आने वाले दिनों में यह धरोहर पूरी तरह नष्ट हो सकती है।
मान्यता है कि यह कुआं शालीभद्र एवं धन्ना सेठ के काल का है और इसका इतिहास महाभारत युग से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि जरासंध काल में लोग इस कुएं में स्नान कर मनियार मठ स्थित नागदेवी मंदिर में पूजा-अर्चना करने जाया करते थे। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह कुआं स्थानीय जीवन का भी अहम हिस्सा था। इसी कुएं के पानी से मनियार मठ परिसर के बाग-बगीचों और पौधों की सिंचाई की जाती थी।
स्थानीय जानकारों के अनुसार, जब कभी इस कुएं को सुखाया गया था, तब इसके नीचे से एक रहस्यमयी मार्ग भी मिला था। हालांकि, सुरक्षा कारणों से कोई व्यक्ति उस रास्ते में अंदर तक नहीं जा सका, जिससे यह पता नहीं चल सका कि वह मार्ग कहां तक जाता है। इससे इस स्थल की ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्ता और भी बढ़ जाती है।
ग्रामीणों ने बताया कि पहले इस कुएं से पटवन के लिए पाइप भी बिछाया गया था, लेकिन अब सब कुछ जर्जर अवस्था में है। आसपास गंदगी और झाड़-झंखाड़ के कारण यह स्थल अपनी गरिमा खोता जा रहा है।
गौरतलब है कि इसी मार्ग से होकर देश-विदेश के पर्यटक सोन भंडार सहित अन्य ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करने जाते हैं। यहां तक कि मुख्यमंत्री का काफिला भी राजगीर प्रवास के दौरान इसी रास्ते से होकर वन विभाग के गेस्ट हाउस तक पहुंचता है। इसके बावजूद इस महत्वपूर्ण धरोहर की अनदेखी समझ से परे है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस प्राचीन कुएं की सफाई, उड़ाही और जीर्णोद्धार कर इसे संरक्षित किया जाए। उनका कहना है कि यदि इसे व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाए, तो यह स्थल भी राजगीर के पर्यटन मानचित्र पर एक नया आकर्षण बन सकता है और पर्यटकों को अपनी ओर खींच सकता है।
