बिहारशरीफ में बढ़ता नशाखोरी का संकट, युवा और बच्चे हो रहे शिकार; सामाजिक संगठनों से अभियान चलाने की अपील

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प्रेम सिंघानिया की रिपोर्ट

बिहारशरीफ। शहर के विभिन्न मुहल्लों में नशाखोरी की बढ़ती प्रवृत्ति चिंताजनक रूप लेती जा रही है। हालात यह हैं कि युवाओं के साथ-साथ छोटे-छोटे बच्चे भी गांजा, अफीम और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन की चपेट में आ रहे हैं। खुलेआम नशे का कारोबार होने से समाज पर इसका गंभीर दुष्प्रभाव पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बैगनाबाद, नईसराय, गढ़पर, अंबर, मुरारपुर, महलपर सहित कई इलाकों की गलियों में नशे के विक्रेता और ग्राहक सक्रिय हैं। गरीब और कमजोर वर्ग के लोग इस समस्या का सबसे अधिक शिकार बन रहे हैं। नशे की लत के कारण कई परिवार आर्थिक संकट, कर्ज और सामाजिक तनाव से जूझ रहे हैं, जिससे घरेलू कलह और आत्महत्या जैसी घटनाएं भी बढ़ रही हैं।

लोगों ने चिंता जताई कि इस गंभीर मुद्दे पर न तो सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई दिख रही है और न ही किसी संस्था द्वारा व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

सामाजिक कार्य में रुचि रखने वाले नागरिकों ने अपील की है कि जो भी सामाजिक संगठन या एनजीओ नशा मुक्ति अभियान पर कार्य कर रहे हों, वे आगे आएं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी ऐसे किसी संगठन के साथ जुड़कर नशे के खिलाफ अभियान चलाने को तैयार हैं। यदि एआईसीवाईए (AICYA) या अन्य संगठन विशेष रूप से नालंदा जिले में इस दिशा में काम कर रहे हैं, तो उन्हें पूरा सहयोग दिया जाएगा।

लोगों का मानना है कि समय रहते सामूहिक प्रयास नहीं किए गए तो यह समस्या समाज की नई पीढ़ी को बर्बाद कर सकती है।

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