सुशीला चमेली आयुर्वेदिक अस्पताल बदहाली का शिकार, तीन दशक से डॉक्टर नहीं, भवन बना मवेशियों का ठिकाना

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जयलेंद्र कुमार की रिपोर्ट,
थरथरी (नालंदा)। थरथरी प्रखंड के भतहर गांव स्थित सुशीला चमेली आयुर्वेदिक अस्पताल इन दिनों बदहाली का दंश झेल रहा है। कभी आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने वाला यह अस्पताल आज पूरी तरह बंद पड़ा है और उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।

वर्ष 1952 में स्थापित इस आयुर्वेदिक अस्पताल में पहले तीन डॉक्टर कार्यरत थे, लेकिन उनके सेवानिवृत्त होने के बाद अब तक किसी नए डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई। करीब 30 वर्षों से चिकित्सक नहीं होने के कारण अस्पताल नाम मात्र का रह गया है।

करीब 30 डिसमिल भूमि में फैला अस्पताल परिसर अब अतिक्रमण की चपेट में है। भवन जर्जर हो चुका है और हालत इतनी खराब हो गई है कि यहां इलाज की जगह गाय, भैंस और बकरियां बांधी जा रही हैं। इससे सरकारी संपत्ति की खुलेआम दुर्दशा हो रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि कुछ वर्ष पूर्व स्थानीय विधायक ने विधानसभा में अस्पताल के पुनर्निर्माण और डॉक्टर की बहाली का मुद्दा उठाया था, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र धीरे-धीरे समाप्ति की कगार पर पहुंच गया है।

भतहर सहित आसपास के दर्जनों गांवों के लोग पहले यहां इलाज कराने आते थे। अब उन्हें छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी दूर-दराज के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल परिसर को अतिक्रमण से मुक्त कराने, नए सिरे से भवन निर्माण कराने तथा स्थायी रूप से डॉक्टर की तैनाती की मांग की है, ताकि क्षेत्रवासियों को फिर से आयुर्वेदिक चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल सके।

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