शालीग्राम शीतल कुंड बन सकता है पर्यटकों का आकर्षण, उपेक्षा से खो रही ऐतिहासिक पहचान

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अनुमंडल संवाददाता, राजगीर, राजीव लोचन की रिपोर्ट —

राजगीर (नालंदा)। ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी राजगीर में स्थित शालीग्राम शीतल कुंड आज प्रशासनिक उपेक्षा के कारण अपनी पहचान खोता जा रहा है। अजातशत्रु किला मैदान के पश्चिम और वैतरणी नदी के उत्तर दिशा में स्थित यह कुंड कभी अपनी शीतलता और पवित्रता के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन पहुंच पथ और रख-रखाव के अभाव में अब यह जर्जर अवस्था में किसी तारणहार की प्रतीक्षा कर रहा है।

राजगीर के 22 कुंड और 52 धाराओं में शामिल यह शालीग्राम कुंड कुएं के आकार का है, जिसमें नीचे उतरने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं। वर्तमान में सीढ़ियां टूट-फूट चुकी हैं और उन पर घास-फूस उग आई है, जिससे इसकी स्थिति बदहाल हो गई है।

कुंड के पश्चिम में स्थित दुखहरनी घाट भी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखता है। यहां सरस्वती, गोदावरी और वैतरणी नदी का जल संगम होता है, जिसे अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है। पुराने समय में श्रद्धालु पहले दुखहरनी घाट में स्नान कर शालीग्राम कुंड में प्रवेश करते थे, लेकिन अब यह घाट भी धीरे-धीरे विलुप्त होता जा रहा है।

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वर्ष 2009 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने प्रवास के दौरान इस स्थल का निरीक्षण कर इसके सौंदर्यीकरण का निर्देश दिया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी इसका जीर्णोद्धार नहीं हो सका। परिणामस्वरूप इस ऐतिहासिक धरोहर की महत्ता अब केवल पुस्तकों तक सिमट कर रह गई है।

पंडा कमेटी के डॉ. धीरेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि पूर्व समय में महाराष्ट्र से आए कुल पुरोहित यहां स्नान-पूजन करते थे। उन्होंने कहा कि राजगीर की इन ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने की जरूरत है, क्योंकि नई पीढ़ी इनके महत्व से अनजान है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि शालीग्राम कुंड की नियमित साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण कराया जाए, तो यह पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन सकता है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि श्रद्धालु भी यहां के शीतल जल में स्नान का आनंद ले सकेंगे।

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