राजगीर जैन आस्था का प्रमुख तीर्थ: महावीर स्वामी ने यहां किए थे 14 चातुर्मास, हर साल डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन
पांचों पहाड़ों पर बने हैं प्राचीन जैन मंदिर, पानी की बेहतर व्यवस्था हो तो बढ़ेगी पर्यटकों की संख्या
अनुमंडल संवाददाता, राजगीर | राजीव लोचन की रिपोर्ट
राजगीर (नालंदा)। जैन धर्म के अनुयायियों के लिए राजगीर एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक तीर्थ स्थल माना जाता है। जैन इतिहास के अनुसार भगवान महावीर स्वामी ने राजगीर में 14 चातुर्मास व्यतीत किए थे, जिससे इस स्थल की धार्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है। यहां स्थित पांचों पहाड़ों पर अनेक प्राचीन जैन मंदिर स्थापित हैं, जो देश-विदेश के श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
हर वर्ष दीपावली से होली के बीच करीब डेढ़ लाख से अधिक जैन श्रद्धालु तीर्थ भ्रमण के लिए विभिन्न राज्यों से राजगीर पहुंचते हैं। हालांकि पहाड़ों पर पानी, शौचालय और प्रकाश व्यवस्था की कमी के कारण श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यदि इन सुविधाओं में सुधार हो जाए तो यहां पर्यटकों की संख्या और बढ़ सकती है।
पांचों पहाड़ों पर स्थित हैं प्रमुख जैन मंदिर
विपुलाचल गिरि पर भगवान मुनिसुब्रत स्वामी का भव्य जिनालय स्थित है, जहां उनकी प्रतिमा के साथ आदिनाथ स्वामी और महावीर स्वामी की चरण पादुकाएं स्थापित हैं। मार्ग में अईमुत्तामुनि का मंदिर भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है।
रत्नागिरि पर चन्द्रप्रभु स्वामी का चौमुखी जिनालय है, जिसमें चन्द्रप्रभु, शांतिनाथ, नेमिनाथ और अभिनंदन स्वामी की प्रतिमाएं विराजमान हैं।
उदयगिरि पर सांवलिया पार्श्वनाथ भगवान का विशाल मंदिर स्थित है, जहां भगवान की श्याम मूर्ति और चरण पादुकाएं स्थापित हैं।
स्वर्णगिरि पर संगमरमर का सुंदर मंदिर है, जिसमें आदिनाथ की प्रतिमा और महावीर स्वामी की चरण पादुकाएं हैं।
वैभारगिरि पर छह जैन मंदिर मौजूद हैं, जिनमें पार्श्वनाथ, महावीर स्वामी, मुनिसुब्रत, बासुपूज्य भगवान एवं गौतम स्वामी आदि के मंदिर शामिल हैं। श्वेताम्बर भंडार तीर्थ के कैशियर संजीव कुमार जैन (बाबू भाई) ने बताया कि इन मंदिरों का वर्ष 2007 में जीर्णोद्धार कराया गया था और हर वर्ष पौष वदी एकम् को मंदिर की वर्षगांठ मनाई जाती है।
चार कल्याणक और गणधरों की निर्वाण भूमि
जैन श्वेताम्बर धर्मशाला के सहायक प्रबंधक ज्ञानेन्द्र पांडेय ने बताया कि 20वें तीर्थंकर मुनिसुब्रत स्वामी के च्यवन, जन्म, दीक्षा और केवल्य ज्ञान जैसे चार कल्याणक इसी पवित्र भूमि से जुड़े हैं। साथ ही 12वें तीर्थंकर बासुपूज्य भगवान की तपश्चर्या का प्रथम पारणा भी यहीं हुआ था। गौतम स्वामी समेत भगवान महावीर के 11 गणधरों की निर्वाण स्थली भी राजगीर का वैभारगिरि पर्वत है।
सुविधाओं की कमी से श्रद्धालु परेशान
तीर्थयात्रियों के अनुसार पहाड़ों पर पानी की सबसे अधिक समस्या है। जैन परंपरा के अनुसार बिना स्नान किए मंदिर में प्रवेश नहीं किया जाता, जिससे श्रद्धालुओं को दिक्कत होती है। इसके अलावा शौचालय और प्रकाश व्यवस्था का अभाव भी परेशानी बढ़ाता है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि प्रशासन और सरकार द्वारा बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो राजगीर जैन तीर्थ के रूप में और अधिक विकसित हो सकता है।
