सूर्यकुंड का जल सेवन और स्नान से मिलते हैं कई रोगों में लाभ, मलमास मेले में उमड़ती है लाखों श्रद्धालुओं की भीड़

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अनुमंडल संवाददाता, राजगीर | राजीव लोचन की रिपोर्टराजगीर (नालंदा)। ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी राजगीर अपने प्राकृतिक गर्म जलकुंडों के कारण देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध है। यहां मौजूद गर्म जलस्रोतों का धार्मिक, पौराणिक और चिकित्सीय महत्व सदियों से माना जाता रहा है। राजगीर में कुल 22 कुंड और 52 प्राकृतिक गर्म जलधाराएं हैं, जिनमें सूर्यकुंड सबसे प्रमुख और आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है।

स्थानीय मान्यता के अनुसार इन कुंडों में स्नान और जल सेवन से कई प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि सालभर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ यहां लगी रहती है। खासकर छठ महापर्व और मलमास मेले के दौरान यहां जनसैलाब उमड़ पड़ता है।

पंडा कमेटी के सदस्य डॉ. धीरेन्द्र उपाध्याय बताते हैं कि सूर्यकुंड का गर्म जल प्राकृतिक औषधीय गुणों से भरपूर है। इसमें स्नान करने से चर्म रोग, जोड़ों का दर्द और अन्य त्वचा संबंधी बीमारियों में लाभ मिलता है। उनका कहना है कि कई कुष्ठ रोगियों को भी इस जल के नियमित स्नान और सेवन से राहत मिली है। यह जल स्वच्छ, सुपाच्य और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है, इसलिए कई श्रद्धालु इसे प्रसाद के रूप में भी ग्रहण करते हैं।

राजगीर में हर ढाई से तीन वर्ष पर प्रसिद्ध मलमास मेला का आयोजन होता है, जिसका धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष है। इस वर्ष भी मई माह में मलमास मेला लगने वाला है। मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु दूर-दराज के राज्यों से यहां पहुंचते हैं और कुंडों में स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं। सुबह से देर रात तक सूर्यकुंड समेत अन्य कुंडों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं।

धार्मिक परंपरा के अनुसार मलमास मेले के दौरान साधु-संतों का विशेष स्नान अनुष्ठान भी होता है। वे पहले गुरुनानक कुंड, फिर सरस्वती कुंड, उसके बाद ब्रह्मकुंड और अंत में सूर्यकुंड में स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस अवधि में सनातन धर्म के तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं का वास राजगीर में होता है और यहां स्नान करने से सभी तीर्थों के बराबर फल की प्राप्ति होती है।

पर्यटन की दृष्टि से भी सूर्यकुंड राजगीर का प्रमुख आकर्षण बना हुआ है। यहां आने वाले पर्यटक प्राकृतिक गर्म जलधाराओं और धार्मिक वातावरण का अनुभव करते हैं। प्रशासन भी मलमास मेला को लेकर सुरक्षा और सुविधाओं की विशेष तैयारी करता है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

कुल मिलाकर, सूर्यकुंड न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यटन की दृष्टि से भी राजगीर की पहचान बना हुआ है।

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