पेयजल योजना में बड़ा खेल: गांव प्यासा, जिला परिषद निधि से खेतों में गाड़ दिए चापाकल — ग्रामीणों का हंगामा, प्रशासन ने दिए हटाने के आदेश
अनुमंडल संवाददाता, राजगीर | राजीव लोचन
राजगीर अनुमंडल क्षेत्र के सिलाव प्रखंड अंतर्गत बड़ाकर पंचायत में जिला परिषद की पेयजल योजना में अनियमितता का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव की पेयजल समस्या दूर करने के लिए स्वीकृत चापाकल आबादी में लगाने के बजाय खेतों के बीच स्थापित कर दिए गए हैं, जिससे आम लोगों को लाभ नहीं मिल रहा है और सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।
बताया जाता है कि जिला परिषद सदस्य (सिलाव दक्षिणी) बेबी देवी द्वारा अपने कोटे से स्वीकृत दो चापाकल गांव के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्से में खेतों के बीच गाड़े गए हैं। इन चापाकलों का उपयोग पेयजल के बजाय सिंचाई के लिए किया जा रहा है, जबकि गांव के लोग पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

पेयजल के नाम पर सिंचाई
ग्रामीणों का कहना है कि जिन चापाकलों से गांव की प्यास बुझनी थी, वे अब खेतों की पटवन में इस्तेमाल हो रहे हैं। इससे योजना की मंशा पर सवाल खड़े हो गए हैं। गांव में नल-जल योजना भी प्रभावी नहीं है, ऐसे में लोग आज भी कुओं और पुराने हैंडपंपों पर निर्भर हैं।
पंचायत सचिव की भूमिका पर उठे सवाल
नियमों के अनुसार चापाकल का स्थल चयन पंचायत सचिव की जिम्मेदारी होती है। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभाव में आकर आबादी से दूर स्थल चुन लिया गया। लोगों ने सवाल उठाया है कि जब गांव में पेयजल संकट गहराया हुआ है, तो खेतों में बोरिंग की अनुमति कैसे दी गई।
ग्रामीणों में रोष
स्थानीय निवासी वाल्मीकि महतो, प्रयाग महतो, अनिल प्रसाद, सुबोध कुमार और कृष्णा पासवान ने बताया कि गांव में पानी की गंभीर समस्या है। इसके बावजूद सरकारी राशि से निजी लाभ पहुंचाया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
प्रशासन सख्त, दिए कार्रवाई के निर्देश
मामले की जानकारी मिलने पर प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रहलाद कुमार ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि खेतों में चापाकल लगाना अनुचित है। प्रशासन ने दोनों चापाकलों को तत्काल हटाकर आबादी वाले क्षेत्र में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है। आदेश का पालन नहीं होने पर संबंधित दोषियों के विरुद्ध जिला मुख्यालय को रिपोर्ट भेजकर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों को अब प्रशासनिक कार्रवाई से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है।
