मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत नालंदा कांग्रेस का धरना, प्रस्तावित कानून को बताया मजदूरों पर सीधा हमलासंशोधन वापस लेने की मांग, डीएम को सौंपा ज्ञापन
प्रेम कुमार की रिपोर्ट
बिहारशरीफ (नालंदा)। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित मनरेगा कानून में बदलाव के विरोध में नालंदा जिला कांग्रेस ने समाहरणालय अस्पताल चौक, बिहारशरीफ के समीप ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का नेतृत्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष नरेश प्रसाद ‘अकेला’ ने किया। बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित संशोधनों को वापस लेने की मांग की।
धरना को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष नरेश प्रसाद ‘अकेला’ ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) देश के गरीबों और मजदूरों की जीवन रेखा है। यह योजना केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि करोड़ों ग्रामीण परिवारों को सम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जीने का अवसर देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित नए कानून में कई ऐसे प्रावधान हैं, जो सीधे तौर पर मजदूरों के हितों के खिलाफ हैं।
उन्होंने मनरेगा से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाने की कोशिश की भी आलोचना करते हुए कहा कि यह देश की भावना और परंपरा के विपरीत कदम है। मनरेगा की पहचान गांधीजी के विचारों और ग्रामीण स्वावलंबन से जुड़ी है, ऐसे में नाम हटाना अस्वीकार्य है।
श्री अकेला ने कहा कि नए प्रावधानों के तहत राज्यों पर आर्थिक हिस्सेदारी का बोझ 40 प्रतिशत तक बढ़ाया जा रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर राज्य समय पर राशि उपलब्ध नहीं करा पाएंगे। इसका सीधा असर मजदूरों के रोजगार और भुगतान पर पड़ेगा। उन्होंने आशंका जताई कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में काम की उपलब्धता घट सकती है और मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिल पाएगी।
उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की कि मनरेगा की मूल भावना और संरचना को बरकरार रखा जाए तथा मजदूर विरोधी प्रस्तावों को तुरंत वापस लिया जाए। साथ ही कार्यकर्ताओं से प्रखंड स्तर तक आंदोलन तेज करने का आह्वान किया।
धरना में जमील असरफ जमाली, डॉ. संजय पटेल, अनुज कुमार, मो. असकर भारती, हैदर आलम, रमेश पासवान, प्रो. फरहद जबीं, रामकेश्वर प्रसाद, निपेंद्र कुमार सिंह, अनिल कुमार चंद्रवंशी, धनंजय पटेल, दिलीप कुमार सिन्हा, मो. इम्तियाज आलम अधिवक्ता, रणधीर रंजन मंटू, भगवान प्रसाद अलबेला, सुरेंद्र सिंह, संजू पांडेय, सुलेखा देवी, रिंकू देवी, सुनीता देवी, रानी देवी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने गरीबों और मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
