नालंदा में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान की शुरुआत, डीएम ने बच्चों को दवा खिलाकर किया शुभारंभ, 11 प्रखंडों में 18 लाख से अधिक लोगों को दी जाएगी दवा, 27 फरवरी तक चलेगा अभियान

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बिहारशरीफ (नालंदा)। जिलेभर में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए मंगलबार को मॉडल सदर अस्पताल, बिहारशरीफ में जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने स्वयं छात्रों को फाइलेरिया रोधी दवा की खुराक खिलाकर सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।

जिलाधिकारी ने कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से रोकी जा सकने वाली बीमारी है। इसके उन्मूलन के लिए सरकार द्वारा सामूहिक दवा सेवन अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने आमजन से अपील की कि किसी भी भ्रांति में न पड़ें और स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा दी जा रही दवा का सेवन अवश्य करें।

यह अभियान 10 फरवरी 2026 से 24 फरवरी 2026 तक घर-घर जाकर चलाया जाएगा। इसके बाद 25 से 27 फरवरी तक स्कूल, कार्यालय, रेलवे स्टेशन, अस्पताल और बस स्टैंड सहित अन्य सार्वजनिक स्थलों पर बूथ व कैंप लगाकर दवा वितरण किया जाएगा। साथ ही 11 फरवरी से आंगनबाड़ी केंद्रों पर मेगा कैंप भी लगाए जाएंगे। अभियान जिले के 11 प्रखंडों—बिहारशरीफ शहरी क्षेत्र, बिंद, चंडी, एकंगरसराय, इस्लामपुर, नूरसराय, परवलपुर, रहुई, सरमेरा, सिलाव और थरथरी—में संचालित किया जा रहा है।

जिले में कुल 18,12,203 लाभार्थियों को दवा देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 82 पर्यवेक्षक, 847 टीमें और 1,694 स्वास्थ्यकर्मी तैनात किए गए हैं। 11 फरवरी को लगभग 561 मेगा कैंप आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में जीविका समूह के सदस्य भी भाग लेंगे।

सिविल सर्जन ने बताया कि फाइलेरिया, जिसे आम भाषा में हाथीपांव कहा जाता है, मच्छर के काटने से फैलता है। यह शरीर के हाथ-पैर, स्तन और अंडकोष (हाइड्रोसिल) को प्रभावित कर गंभीर दिव्यांगता का कारण बन सकता है। इस बीमारी का प्रभाव कई वर्षों बाद दिखाई देता है, इसलिए साल में एक बार फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन जरूरी है। दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी को यह दवा दी जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि दवा हमेशा भरपेट भोजन के बाद ही लें। कुछ लोगों को हल्का बुखार, सिरदर्द, चक्कर या उल्टी जैसी सामान्य प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं, जो शरीर में कीटाणुओं के नष्ट होने का संकेत है। घबराने की आवश्यकता नहीं है।

जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस और अस्पताल में उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस अभियान के तहत डीईसी और एल्बेंडाजोल दवा दी जा रही है। महादलित विकास मिशन के विकास मित्र भी टोले-मोहल्लों में जागरूकता फैलाकर लोगों को दवा सेवन के लिए प्रेरित करेंगे।

कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त, सिविल सर्जन, जिला स्वास्थ्य समिति के पदाधिकारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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