भ्रमण दर्शन योजना के तहत गया के 80 मत्स्यपालकों ने नालंदा हैचरी में लिया प्रशिक्षण
अनुमंडल संवाददाता, राजगीर, राजीव लोचन की रिपोर्ट —
भ्रमण दर्शन योजना के तहत गया जिले के मत्स्यपालकों का एक दल सोमवार को प्रशिक्षण एवं अध्ययन दौरे पर नालंदा पहुंचा। मत्स्य विकास पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार के नेतृत्व में 80 मत्स्यपालक किसानों ने मोहनपुर मत्स्य हैचरी का भ्रमण कर आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को मत्स्य पालन, मत्स्य बीज उत्पादन, मछलियों के रखरखाव, तालाब एवं नर्सरी की तैयारी, हैचरी प्रबंधन तथा कम लागत और कम जगह में अधिक उत्पादन की तकनीकों से अवगत कराया गया।
इस अवसर पर मोहनपुर मत्स्य हैचरी के संचालक सह बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहयोग समिति लिमिटेड के निदेशक शिवनंदन प्रसाद उर्फ शिव जी ने कहा कि मत्स्य पालन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार कृषि में फसलों की अच्छी वृद्धि के लिए जैविक एवं रासायनिक खाद का उपयोग किया जाता है, उसी प्रकार मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए तालाबों में समय-समय पर उचित मात्रा में खाद का प्रयोग आवश्यक है।
उन्होंने जानकारी दी कि मत्स्य पालन के लिए तालाब के पानी का पीएच मान 7.5 होना चाहिए। पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं रहने पर मछलियों की वृद्धि प्रभावित होती है। इसके लिए प्रति एकड़ 40 से 50 किलोग्राम चूना का घोल बनाकर पूरे तालाब में छिड़काव करना लाभकारी होता है।
मत्स्य विकास पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार ने बताया कि अधिक उत्पादन के लिए मछलियों को कृत्रिम भोजन जैसे सरसों व बादाम की खली, गेहूं का चोकर, चावल का ब्रान एवं अन्य संतुलित आहार देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मत्स्य बीज के वजन का लगभग 5 प्रतिशत भोजन देने से मछलियों की तेजी से वृद्धि होती है। सही प्रबंधन से एक एकड़ तालाब में 2 से 2.5 हजार किलोग्राम तक मछली उत्पादन संभव है।
भ्रमण के दौरान गया जिले के महिला एवं पुरुष मत्स्यपालकों ने हैचरी का बारीकी से निरीक्षण कर तकनीकी जानकारी हासिल की। दल में नरेंद्र कुमार, ब्रजेश कुमार, चंचला देवी, मंजू देवी, किरण गुप्ता, देवांती देवी, गीता देवी, सुमित्रा देवी, प्रभा कुमारी समेत कई किसान शामिल थे।
