गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी नदी पार होने से मिलती है मोक्ष, मलमास मेला में बढ़ जाता है इस नदी तट का महत्व,यहां पर मेला में पिण्ड दान करने भी आते हैं लोग
राजगीर नालंदा : सनातन धर्म का प्रसिद्ध ऐतिहासिक मलमास मेला इस साल लगने वाला है। मलमास मेला में राजगीर में लाखों की संख्या में श्रद्धालु देश के कोने-कोने से आते हैं। इस दौरान यहां के कुंडों में लोग स्नान करते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां पर कुंडों में स्नान करने से सभी धामों के बराबर का फल मिलता है। भवसागर को पार करने के लिए देश व विदेशों से काफी संख्या में श्रद्धालु वैतरणी नदी घाट पर आते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस नदी को जो लोग गाय की पूंछ पकड़कर पार करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही इस मेले के पवित्र माह में यहां पर पिण्ड दान भी किया जाता है। इस साल भी मेलें में भवसागर को पार करने की मंशा लिए सैंकड़ों श्रद्धालु राजगीर आयेंगे। लोगों ने बताया कि जब से नदी का सौंदर्यीकरण हुआ तब से यह नदी घाट का पानी जम गया है। नदी में पत्थर देकर उसकी सोई को बंद कर दिया गया है। नदी तट के आगे बांध बना दिया गया है। इस कारण पानी आगे नहीं निकल पाता। पहले नदी के तल में पत्थर नहीं था। वहां पर मिट्टी थी। उससे सोई निकलती थी जिससे सालों पानी रहता था। लोग सालों भर इसमें स्नान करते थे। वहीं बारिश होने पर जंगल से पानी आता था, जो कि किसानों के खेतों में पटवन के लिए जाता था। लोगों ने बताया कि अब यह नदी घाट एक शोभा बनकर रह गयी है। मेला के समय या फिर छठ के समय ही इसकी सफाई हो पाती है। लोगों ने कहा कि नदी को अब नाला के समान ही बना दिया गया है। नदी तट से पत्थर को हटा दिया जाय और इसका पहुंच लोगों तक सुलभ कर दिया जाय तो यह नदी घाट पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बन सकता है।
