सफाई की वाट जोह रही अहिल्या कुंड :सूर्यकुंड परिसर में स्थित है अहिल्या कुंड :उचित देखरेख के अभाव में कुंड बन गया है कूड़ा दान :

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अनुमंडल संवाददाता, राजगीर

राजीव लोचन की रिपोर्ट…

राजगीर (नालंदा) : पुराने समय में जिस तरह अहिल्या को पत्थर से औरत बनने के लिए भगवान श्रीराम का इंतजार करना पड़ा था, उसी तरह सूर्यकुंड परिसर में स्थित अहिल्या कुंड को सफाई के लिए किसी तारणहार की वाट जोहना पड़ रहा है। लगता है मानो अहिल्या कुंड में सालों से सफाई नहीं की गयी है। पानी में हरे रंग का काई जम गया है। गंदगी के कारण पानी का रंग ही बदल गया है। इस अंतरराष्ट्रीय पर्यटक नगरी में देश-विदेश से आने वाले तीर्थ यात्रियों व पर्यटकों के लिए 22 कुंड हैं व 52 धाराएं हैं। इनमें से कुछ कुंड में तो ताला ही लगा रहता है। कई में पानी की धार ही बंद हो गयी है। सूर्यकुंड परिसर में भी कई कुंड हैं जिसमें से एक अहिल्या कुंड भी है।

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परिसर का सौंदर्यीकरण एवं जीर्णोद्धार का काम वर्ष 2011 में हुआ था। अहिल्या कुंड को देखने से लगता है कि मानों सालों से इसकी सफाई नहीं की गयी है। इसके लिए न तो प्रशासन और न पंडा कमेटी जागरूक दिखती है। तभी तो कुंड के गेट में ताला जरूरी लटका है और उसके अंदर डस्टबिन रखा हुआ है। उसके अंदर कपड़ा भी पसरा है। इससे लगता है कि इस कुंड का लोग अपने पर्सनल उपयोग के लिए कर रहे हों। यहां पर देश के कोने-कोने से आने वाले पर्यटकों को इस कुंड की धारा का लाभ लेने से वंचित रहना पड़ रहा है। लोगों की मानें तो कुंड की ऐसी मान्यता रही है कि जब राजगीर में तीन साल पर मलमास मेला लगता है उस समय यहां पर तैंतीस कोटि देवी-देवता का वास राजगीर में होता है। इस दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु यहां के सभी कुंड व धाराओं में स्नान कर लाभ उठाना चाहते हैं। लोगों का कहना है कि मेला के बाद राजगीर के कई कुंडों की स्थिति प्रशासन की अनदेखी के कारण बद से बदत्तर हो जाती है। लोगों ने प्रशासन से सभी कुंडों की लगातार सफाई करवाने की मांग की है ताकि श्रद्धालु यहां के धाराओं का लाभ ले सकें। वहीं इस वर्ष मेला भी लगने वाला है। इसके बाद भी इस कुंड की सफाई के प्रति लापरवाही देखी जा रही है। ऐसे में देश के विभिन्न जगहों से आने वाले पर्यटकों में गलत संदेश जा रहा है।

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