ज्ञान की धरती नालंदा से उठा आत्मनिर्भरता का तूफान: एकंगरसराय के कन्हैयागंज में पिंटू विश्वकर्मा ने 6 महीने की मेहनत से तैयार किया ‘टोरनाडो झूला’, चीन को दी सीधी टक्कर
चीन को टक्कर दे रहा नालंदा का हुनर: एकंगरसराय के पिंटू विश्वकर्मा ने बनाया ‘टोरनाडो झूला’
नालंदा। ज्ञान की धरती के रूप में विश्व प्रसिद्ध नालंदा अब तकनीकी नवाचार और स्वदेशी निर्माण के क्षेत्र में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। नालंदा जिले के एकंगरसराय प्रखंड अंतर्गत कन्हैयागंज निवासी पिंटू विश्वकर्मा ने चीन के डिजाइन पर आधारित ‘टोरनाडो झूला’ का निर्माण कर नई मिसाल पेश की है।
करीब छह महीने की कड़ी मेहनत और लगन के बाद तैयार किया गया यह झूला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। पिंटू विश्वकर्मा ने बताया कि पहले इस तरह के झूले चीन से भारत में आयात किए जाते थे, लेकिन उन्होंने यूट्यूब पर इसका डिजाइन देखकर इसे खुद बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि यदि तकनीक और डिजाइन की सही समझ हो, तो किसी भी विदेशी उत्पाद को देश में ही तैयार किया जा सकता है।

पिंटू के अनुसार, उनका उद्देश्य सिर्फ एक झूला बनाना नहीं, बल्कि चीन के उत्पादों को कड़ी टक्कर देना है। उन्होंने दावा किया कि अब चीन के विभिन्न झूलों के डिजाइन कन्हैयागंज में तैयार किए जा रहे हैं और उन्हें लगातार लॉन्च भी किया जा रहा है। इससे स्थानीय कारीगरों को रोजगार मिलने के साथ-साथ ‘मेक इन इंडिया’ की भावना को भी बल मिल रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र में तैयार यह टोरनाडो झूला न केवल तकनीकी दक्षता का उदाहरण है, बल्कि यह साबित करता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद प्रतिभा और परिश्रम से वैश्विक स्तर की चीजें बनाई जा सकती हैं।

झूला निर्माता पिंटू विश्वकर्मा ने बताया की पहले इस तरह का झूला चीन से आता था। मैंने यूट्यूब पर इसका डिजाइन देखा और सोचा कि इसे हम अपने यहां क्यों नहीं बना सकते। छह महीने की मेहनत के बाद हमने इसे तैयार कर लिया। अब हमारा लक्ष्य है कि चीन के हर डिजाइन को यहीं बनाकर बाजार में उतारा जाए।
स्थानीय लोगों ने पिंटू विश्वकर्मा के इस प्रयास की सराहना की है और इसे नालंदा की नई पहचान के रूप में देखा जा रहा है।
